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Saturday, December 11, 2010

सुनसान धडकनों की चाल में...गुदगुदी सी जगा जाते हो,
शराबी मन को...नशे के जाम पिला जाते हो,
हवाओं में समाकर...मेरी नम आखों को छू जाते हो,
कभी यूँ ही...मुझमे आकर मुस्कुरा जाते हो,
फ़िर बड़े ही प्यार से...अपने प्यार में छोड़ जाते हो!

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